कोई भूखा ना रहे


पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अनुसार हमारे चिंतन में व्यक्ति के शरीर ,मन, बुद्धि और आत्मा सभी का विकास करने का उद्देश्य रखा है |उन सभी की भूख मिटाने की व्यवस्था है | किन्तु यह ध्यान रखा की एक भूख को मिटाने के प्रयत्न में में दूसरे की भूख न पैदा कर दे और दूसरे के भूख मिटाने का मार्ग न बंद कर दे |
FDI -( FOREIGN DIRECT INVESTMENT )

UPA सरकार की ऐसी नीति जो पंडित दीनदयाल जी की इस विचारधारा के ऊपर कुठाराघात करती है | हमारे विरोध करने का कारण भी यही है |

बुभुक्षितः किं न करोति पापं |

क्षीणा जनाः निष्करूणाः भवन्ति ||
भूखा सब पाप कर सकता है |कमजोर लोगो में करूणा नहीं होती है |
पंडित दीनदयाल जी के अनुसार धर्म महत्वपूर्ण है परन्तु यह नहीं भूलना चाहिए की अर्थ के आभाव में धर्म नहीं टिक पाता है |
खुदरा व्यापार क्षेत्र में विदेशी पूंजी का निवेश हमारी भारतीय अर्थ व्यवस्था को समाप्त कर देगी |
भारतीय खुदरा व्यापार हमारी देश की अर्थव्यवस्था प्रमुख आधार है सीधे तौर पर ७० करोड जनता इस से जुडी हुई है ,खुदरा व्यापार हमारे देश में कृषि के बाद ऐसा प्रमुक जिवकोउपार्जन का साधन है , जो केन्द्र सरकार की FDI नीती से सीधे प्रभावित होती है |
विदेशी पूंजी का निवेश भारत में भारत की जनता तथा उसके विकास के लिए नीवेश होना चाहिए |FDI नीती भारत में भारत के लिए ऐसा कुछ नहीं करने वाली |
इसके लागू होने पर भारत में विदेशो के बड़े बड़े पूंजीपति जिनके बड़े बड़े स्टोर सारे विश्व में फैले हूए है भारत में भी खुल जायेंगे | आप सोच रहे है की इस से क्या होगा ?
१. कंपनियों द्वारा होने वाले लाभ के कारण भारत गरीबी की ओर जायेगी |
२. कंपनिया निर्माता से सीधे खरीदी करेंगे जिससे आज के समय में C&F , DISTRIBUTOR , DELAR जैसे व्यापारी सारे भारत में गाँव गाँव तक निर्माता के माल को पहुचाते है समाप्त हो जायेंगे | सरकार को इनकम टैक्स का ३६ % भागीदारी रखने वाले व्यापारियों के बारे में क्या नीती है ?
३. C&F , DISTRIBUTOR , DELAR जैसे व्यापारी समाप्त हो जाने की स्थिति में गाँवो और शहरो के दुकानदारों को माल कैसे पहुचेगा ? उनकी जीविका के लिए सरकार के पास क्या नीती है ?
४. विदेशी कम्पनियो द्वारा किसानो के खेत अनुबंध किये जायेंगे तथा अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप खेती करवाई जायेगी जिससे किसान के फसल किसान के न रहकर किसी अन्य के होंगे ,किसान अपने ही खेत में विदेशियों की चाकरी करेंगे |
५. प्रारंभिक रूप पर सीधे ग्राहक के बिच में मध्यस्त ये कम्पनियाँ ग्राहकों को सस्ते माल दे कर भारतीय खुदरा व्यापार करने वाले व्यापारियों से प्रतिस्पर्धा करेंगी जिससे भारतीय खुदरा व्यापार समाप्त हो जाएगा |
६. ये विदेशी कंपनियाँ अपनी कुल बिक्री का ७०% माल कही से भी लाने में स्वतंत्र है , ये भारतीय उद्द्योग जगत और लघु उद्द्योग को सीधे प्रभावित करेगा |
७. भारत का कुल खुदरा व्यापार की तुलना WALL MART से करे तो कंपनी का कुल लाभ इसके बराबर है |

यह एक सामान्य आकडे एवं संभावनाए है जिसे देख कर यह लगता है की कही यह भारतीय अर्थ व्यवस्था को समाप्त करने की सुनियोजित नीति तो नहीं है ? भारत ऐसे विचारों से आर्थिक गुलामी की ओर चला जायेगा |
मसाले का व्यापार करने आई ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भारत पर १९० वर्षों तक राज किया ,भारत स्वालम्बी ,स्वाभिमानी राष्ट्र के रूप में हो, हमारे पूर्वज इसलिए बलिदान हुए |स्वाधीनता का संघर्ष २०० साल पुराना है,
आज ऐसे शाशक को देख कर हमारे पूर्वजो की आत्मा क्या रोती नहीं होगी ?

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